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देहरादून : ईवा आशीष श्रीवास्तव के नेतृत्व में सुद्धोवाला में डिजिटल जनगणना की मॉक ड्रिल, 50 घरों का डेटा ऐप पर दर्ज
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देहरादून : ईवा आशीष श्रीवास्तव के नेतृत्व में सुद्धोवाला में डिजिटल जनगणना की मॉक ड्रिल, 50 घरों का डेटा ऐप पर दर्ज

निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव की देखरेख में सुद्धोवाला में मास्टर ट्रेनर्स का फील्ड अभ्यास, डिजिटल जनगणना की तैयारी तेज 

​देहरादून (सुद्धोवाला): भारत की पहली डिजिटल जनगणना की तैयारियों को अमलीजामा पहनाने के लिए उत्तराखंड में गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में आज विकासनगर क्षेत्र के सुद्धोवाला गांव में जनगणना मकान सूचीकरण (House listing) का एक महत्वपूर्ण मॉक ड्रिल और रिहर्सल आयोजित किया गया। यह पूरा अभियान भारत सरकार के जनगणना संचालन निदेशालय (उत्तराखंड) की निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव की देखरेख में संपन्न हुआ।

डिजिटल ऐप पर दर्ज हुआ 50 परिवारों का डेटा

​राज्य स्तर पर प्रशिक्षण देने के लिए नियुक्त 23 मास्टर ट्रेनर्स ने इस फील्ड रिहर्सल में हिस्सा लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के हिस्से के रूप में, इन मास्टर ट्रेनर्स ने सुद्धोवाला के लगभग 50 घरों का दौरा किया। टीम ने घर-घर जाकर ‘House listing App’ के माध्यम से मकानों की स्थिति और परिवारों से जुड़ी जानकारी डिजिटल रूप से रिकॉर्ड की।

तकनीक और शुद्धता पर जोर: निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव

​अभ्यास के दौरान अधिकारियों का मार्गदर्शन करते हुए निदेशक श्रीमती ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि:

​”जनगणना की प्रक्रिया को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए डिजिटल माध्यम का उपयोग अनिवार्य है। सुद्धोवाला में आयोजित यह रिहर्सल हमारे मास्टर ट्रेनर्स को फील्ड की व्यावहारिक बारीकियों से रूबरू कराने के लिए था। अब यही ट्रेनर्स पूरे प्रदेश में प्रगणकों को प्रशिक्षित करेंगे ताकि राज्य में डेटा संग्रह का कार्य सुचारू रूप से चल सके।”

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

​प्रशिक्षण का उद्देश्य: मोबाइल ऐप की कार्यक्षमता और डेटा सिंकिंग की प्रक्रिया को सुनिश्चित करना।

​मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका: प्रशिक्षित 23 मास्टर ट्रेनर्स अब राज्य के विभिन्न जनपदों में जाकर जमीनी स्तर के कर्मचारियों को प्रशिक्षण देंगे।

डिजिटल इंडिया की पहल: कागज-रहित जनगणना की दिशा में यह एक बड़ा कदम है, जिससे आंकड़ों का विश्लेषण तेज और सटीक होगा।

इस अभ्यास सत्र के दौरान ग्रामीणों ने भी टीम का सहयोग किया। विभाग का लक्ष्य है कि आधिकारिक जनगणना शुरू होने से पहले सभी तकनीकी पहलुओं को पूरी तरह दुरुस्त कर लिया जाए।

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