जिम कॉर्बेट के जंगल राज पर धाकड़ धामी का हथौड़ा”

धामी सरकार का ये जुदा अंदाज़ उन भ्रष्टाचारियों के लिए खतरे की घंटी,जो पहले के जंगलराज में बजाते रहे है चैन की बंसी

न्यूज़ वायरस नेटवर्क –

दुनिया भर में मशहूर उत्तराखंड के जंगलों में भ्रष्टाचार की जड़ें किस कदर मज़बूत होती जा रही है इस पर यकीन करना मुश्किल है क्योंकि जिस देवभूमि में दुनियाभर के सैलानी विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में खूबसूरत नजारों का दीदार करने के लिए आते हैं और आज  उसी कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के जमीन में दफन है तथाकथित भ्र्ष्टाचार से जुड़ी बड़ी-बड़ी घटनाएं और शासन-प्रशासन की सख्त नजर से बचते हुए संभावित घोटालों की लम्बी फेरहिस्त …

कॉर्बेट नेशनल पार्क जिसे वाइल्ड लाइफ के लिए दुनिया भर में जाना जाता है और भारत में घनत्व के लिहाज से सबसे ज्यादा बाघ यहीं पर है बावजूद इसके आज वही कॉर्बेट नेशनल पार्क तथाकथित भ्रष्टाचार से जुडे संगीन मामलों और कुछ संदिग्ध अधिकारियों की वजह से बदनाम हो रहा है। प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि न सिर्फ कोर्ट के आदेशों की अवहेलना की जा रही है बल्कि प्रदेश की धामी सरकार के सख्त आदेश , पैनी नज़र और  जीरो टॉलरेंस के फार्मूले को भी कुछ अफसर ठेंगा दिखा रहे हैं।  हम बात कर रहे हैं कॉर्बेट नेशनल पार्क में हुए अवैध क्रियाकलापों की  , पेड़ों के अवैध कटान की और तमाम संदिग्ध भवन निर्माण की जिस पर अब धामी सरकार ने चला दिया है सख्त हथौड़ा और थमा दिया ताकतवर अधिकारी को कारण बताओ नोटिस  .

आपको बता दें कि पूरा मामला दरअसल है क्या ? …. दरअसल जिस कॉर्बेट नेशनल पार्क के अंतर्गत निर्माण कार्यों में पाई गई है भारी अनियमितता,लापरवाही। अवैध रूप पेड़ों को काटने के मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त निर्देश दिए हैं

जो बेहद गंभीर आर्थिक अपराध की और इशारा करते हैं  , जिसमें पारदर्शी जांच के बाद पार्क निदेशक सहित कई हाईप्रोफ़ाइल चेहरे बेनक़ाब हो सकते हैं। इसीलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर पार्क के निदेशक राहुल को कारण बताओ नोटिस थमाया गया है साथ ही साथ कड़ी कार्यवाही का इरादा भी जता दिया लगता है।

सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर कमेटी की जांच की आंच संभावित

आपको बता दें कि इसके पूर्व में वन विभाग के मुखिया अर्थात प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी की ओर से कराई गई जांच में भी पूरे प्रकरण में पार्क के निदेशक की संलिप्तता और संदिग्ध भूमिका उजागर हुई थी। यह सभी गड़बड़ियां तत्कालीन वन मंत्री डॉ हरक सिंह रावत के कार्यकाल की बताई जा रही है , जो अब फिलहाल न सरकार में है और ना ही भाजपा में , लिहाजा अब उन पर कानून का सख्त घेरा बन सकता है जिसका रास्ता निदेशक से होकर गुजरता नजर आ रहा है।

कभी भी हटाए जा सकते है पार्क निदेशक

प्राप्त जानकारी के मुताबिक बीते वर्ष कार्बेट नेशनल पार्क के अन्तर्गत कंडी रोड निर्माण, गोरपट्टी तथा पाखरो वन विश्राम गृहों के निर्माण, पाखरो में जलाशय निर्माण में अनियमितता, नियमों की अवहेलना और पाखरो में प्रस्तावित टाइगर सफारी में वृक्षों के अवैध कटान की शिकायत हॉफ को मिली थी। इसी क्रम में तत्कालीन हॉफ राजीव भरतरी  ने 12 जनवरी 2022 को पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन कर इन सभी मामलों की गहन जांच के आदेश दिए थे। समिति ने 7 फरवरी 2022 को अपनी जांच आख्या हॉफ को सौंप दी थी, जिसमें कार्बेट पार्क के निदेशक को इन सभी मामलों में अनियमितता, नियमों की अवहेलना और हीलाहवाली बरतने का दोषी पाया । जांच में यह भी पाया गया कि निदेशक ने एफसीए में
निर्गत स्टेज 1, स्टेज 2 और केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की ओर से जारी सैद्धांतिक स्वीकृतियों की शर्तों का अनुपालन भी नहीं करवाया। इतना ही नहीं उनकी ओर से टाइगर कंजर्वेशन प्लान का मिड टर्म रिव्यू कराए जाने के लिए एनटीसीए को भी प्रस्ताव भेजने में हीलाहवाली की गई। निदेशक  की द्वारा की गयी ये सभी एक्टिविटी अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमावली 1986 के विरुद्ध पाई गयी थी मगर निदेशक पद पर बने रहे।

पार्क निदेशक पर  शिकंजा

शासन के अपर मुख्य सचिव आनंद वर्धन की ओर से कार्बेट टाइगर रिजर्व, रामनगर, नैनीताल के निदेशक राहुल को जारी कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि कार्बेट नेशनल पार्क के अंतर्गत कंडी रोड निर्माण, गोरपट्टी, पाखरी वन विश्राम गृह परिसर में भवनों का निर्माण, पाखरी वन विश्राम गृह के समीप जलाशय का निर्माण, पाखरी में प्रस्तावित टाइगर सफारी में वृक्षों के अवैध पातन को लेकर समिति गठित की गई थी…. गठित पांच सदस्यीय समिति की ओर से प्रस्तुत उक्त जांच आख्या में कंडी रोड निर्माण, मोरघट्टी तथा पाखरी वन विश्राम गृह परिसर में भवनों का निर्माण, पाखरी वन विश्राम गृह के समीप जलाशय का निर्माण और प्रस्तावित टाइगर सफारी में वृक्षों के अवैध पातन के संबंध में गंभीर प्रशासनिक, वित्तीय विधिक एवं आपराधिक अनियमितताएं परिलक्षित हुई हैं….  इस अवधि और वर्तमान में भी निदेशक,कार्बेट टाइगर रिजर्व, रामनगर, नैनीताल के पद पर ही कार्यरत हैं.

प्रकरण के समय में प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) देहरादून की ओर से गठित पांच सदस्यीय समिति की ओर से प्रस्तुत उक्त विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट सात फरवरी के क्रम में प्रदत्त संस्तुति के आधार पर उनके द्वारा एफसीए में निर्गत स्टेज-1 एवं स्टेज-2 के स्वीकृतियों के अन्तर्गत निर्गत शर्तों का अनुपालन केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा सैद्धान्तिक स्वीकृति वार्ता और एनटीसीए को प्रस्ताव प्रेषित करने संबंधी कार्यों में प्रभावी योगदान न करने एवं लापरवाही सामने आई है….  उनका यह कृत्य अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण) नियमावली, 1968 के विरुद्ध है. यह कृत्य अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण) नियमावली, 1968 के विरुद्ध बताया गया है. अतएव जिसके मुताबिक क्यों न उनके विरुद्ध अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के प्रावधानों के अन्तर्गत अनुशासनिक कार्रवाई प्रचलित की जाए….
प्रमुख वन संरक्षक के माध्यम से इस कारण बताओ नोटिस की प्राप्ति की तिथि से 15 दिनों के भीतर शासन को उपलब्ध कराने का बात कही गई है…. जारी पत्र के अनुसार यदि निदेशक द्वारा निर्धारित समयान्तर्गत स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो यह समझा जाएगा कि निदेशक उक्त तथ्यों के संबंध में कोई स्पष्टीकरण,प्रत्युत्तर प्रस्तुत नहीं करना चाहते हैं….इसलिए  सुसंगत नियमावलियों में निहित प्रावधानों के अंतर्गत प्रशासनिक वैधानिक अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारम्भ कर दी जाएगी…. ये तो बात हुयी नोटिस की,इस संबंध में न्यूज़ वायरस को अपने पक्ष से अवगत कराते हुए निदेशक राहुल का कहना है कि उन्होंने कोई भी ऐसा फैसला नहीं किया है जो कानून के दायरे से बाहर हो , इसके साथ साथ अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए निदेशक राहुल ने दावा किया कि किसी भी तरह के कथित भ्र्ष्टाचार और अनियमितता में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने जो भी फैसले किये वो सभी वन विभाग के नियमों के दायरे में ही लिए गए है,नियम विरुद्ध कुछ भी नही।

हांलाकि सवाल कई हैं जो निरुत्तर नज़र आ रहे हैं —–सवाल नंबर 1 – किसकी कृपा से कॉर्बेट में कथित भ्रष्टाचार की इमारत खड़ी हुई ? सवाल नंबर 2 – जब महकमे से वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारी हटाए गए तो निदेशक को किसने बचाया ? सवाल नंबर 3  – जब 3 साल से ज्यादा एक पद पर पोस्टिंग नहीं रहती तो 4 साल से क्यों धरतीपकड़ बने हैं निदेशक ?  सवाल नंबर 4  – पुल  , इमारतों को बनाकर किसने ध्वस्त करवाया और क्यों ?सवाल नंबर 5 – कोविड गाइडलाइन्स के दौरान क्यों हुआ निर्माण कार्य ?

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जंगल में फैली भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं की जड़ पर कड़ा प्रहार करते हुए प्रदेश के अधिकारियों को सख्त नज़ीर पेश की है और ये बता दिया है कि  भ्रष्टाचार, अनियमितता और लापरवाही के मामले उजागर होने पर दोषियों को कतई बख्शा नहीं जाएगा। विभाग के सूत्र बताते हैं कि कार्बेट नेशनल पार्क जैसे संवेदनशील रिजर्व क्षेत्र में निर्माण कार्यों में अनियमितता और वृक्षों के अवैध पातन को लेकर मुख्यमंत्री धामी बेहद खफा हैं। ऐसे में विभाग के ईमानदार और वन प्रेमियों के साथ साथ जनता को उम्मीद है कि इस बेहद गंभीर मामले में सरकार पारदर्शी और तेज़ कार्यवाही करेगी और जांच की आंच असली दोषियों तक ज़रूर पहुंचेगी फिर चाहे उन अफसरों और नेताओं की पहुँच कितनी भी ऊँची क्यों न हो उसको हकीकत की ज़मीन ज़रूर दिखाई जाएगी। धाकड़ धामी का ये जुदा अंदाज़ अब उन भ्रष्टाचारियों के लिए खतरे की घंटी बन गया है जो पहले के जंगलराज में चैन की बंसी बजाते रहे है।

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