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    रिसर्च में दावा – मौत की वजह बन सकता है चावल का शौक़ ,पकाने से खाने तक बरतें सावधानी  

    अगर आप गर्मागर्म चावल दाल , चावल कढ़ी , चावल राजमा और पुलाव के शौक़ीन हैं और रोजाना खाने में दानेदार ज़ायकेदार चावल खूब खा रहे हैं तो ये हमारी ये खबर ध्यान से पूरी ज़रूर पढियेगा क्यूंकि ये खबर आपको सावधान करने वाली है उस अनजान खतरे से जिसका खुलासा किया है ब्रिटेन की मैनचेस्टर और सॉल्फोर्ड यूनिवर्सिटी की संयुक्त रिसर्च टीम के शोधकर्ताओं ने  …. 

    शोधकर्ताओं ने कहा, चावल में आर्सेनिक होने के कारण दुनियाभर में हर साल हज़ारों लोगों की मौत हो रही है। ताज़ा रिसर्च में ये बात भी सामने आयी है कि हृदय रोगों से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण अधिक चावल खाना भी है। इसकी वजह चावल में प्राकृतिक तौर पर आर्सेनिक तत्व का मौजूद होना है। अब बात भारत की करें तो नेशनल सैम्पल सर्वे के मुताबिक, भारत में चावल सबसे ज्यादा बिहार और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में खाया जाता है।

    अमूमन गांव में एक भारतीय हर महीने 6 किलो चावल खाता है वहीं, शहरी इंसान में यह आंकड़ा 4.5 किलो है। उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में चावल अधिक खाया जाता है। सैम्पल सर्वे के मुताबिक, देश में दक्षिण, पूर्व और उत्तर-पूर्व के लोगों को चावल काफी पसंद है। ज्यादातर राज्यों में लोग चावल खाना पसंद करते हैं, ऐसे में इन राज्यों के लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।



    रिसर्च में ये बात सामने आयी है कि किसान सिंचाई के समय आर्सेनिक वाले रसायन का छिड़काव करते हैं। चूँकि चावल की फसल लम्बे समय तक पानी में डूबी रहती है इसलिए इसमें 10-20 फीसदी आर्सेनिक ज्यादा पाया जाता है। आर्सेनिक के जहरीले रसायन से आपको कितना खतरा होगा ये बात इस पर निर्भर करता है कि आप एक दिन में कितना चावल खाते हैं।  ब्रिटेन की क्वींस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता दावा कर रहे हैं कि  अगर चावल को बनाने का तरीका बदलें तो आर्सेनिक के असर को कम किया जा सकता है। सामान्य तौर पर लोग चावल को कूकर में तब तक पकाते हैं जब तक यह पूरा पानी सोख न ले। ऐसा करने पर आर्सेनिक चावल में बना रहता है।

    इस नयी खोज में बताया गया है कि चावल में पानी की मात्रा बढ़ाने पर आर्सेनिक ज्यादा अच्छी तरह से निकलता है। 12 गुना पानी डालने पर 57 प्रतिशत से ज्यादा आर्सेनिक कम हो जाता है। इससे साबित होता है कि चावल के पानी में आर्सेनिक ज्यादा एक्टिव रहता है लिहाज़ा उसे छान कर अपनी पहुँच से दूर किया जा सकता है।

    तो आप भी अगली बार किचन में चावल बनाये या प्लेट में  चावल खाने बैठे तो ध्यान रखें कि कहीं ये शौक आपकी जान का दुश्मन बन जाए। 

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