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    लॉक डाउन के दर्द पर महिला ने पीएम मोदी को सुनाई “मन की बात”  

    कहानी घर घर की डेली सोप आपने ज़रूर देखा होगा …. वो तो टीवी सीरियल था लेकिन असल ज़िंदगी में एक दुखी हाउस वाइफ ने अपनी असली कहानी प्रधानमंत्री मोदी से कविता के ज़रिये साझा कर जवाब माँगा है। क्या झाड़ू के हैंडल पर लिखा होता है कि इसे केवल महिलाएं ही चलाएंगी? क्या वॉशिंग मशीन और गैस स्टोव के मैनुअल में भी ऐसा कुछ लिखा होता है? फिर क्यों ज्यादातर पुरुष घर के कामों में हाथ नहीं बंटाते हैं? कमोबेश हर घर से जुड़े ये सब सवाल उस ऑनलाइन याचिका के अंश से जुड़े हैं जो कोरोनाकाल में घर और रसोई में अचानक बढ़े महिलाओं के कामकाज को लेकर दायर की गई है।

    ये दिलचस्प और कहानी घर घर की आज देश भर की महिलाओं में काफी चर्चाओं में हैं क्यूंकि एक पीड़ित महिला ने पुरे मामले को को कोर्ट में पहुंचा दिया है …… पिटीशन मुंबई में रहने वाली सुबर्णा घोष ने फाइल की है। इस पर तकरीबन 71 हजार से ज्यादा लोग अपने हस्ताक्षर कर चुके हैं। घोष चाहती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने किसी संबाेधन में इस मामले पर कुछ बोलें। इस मसले का कोई उपाय सुझाएं और पुरुषों से कहें कि वे भी घर के कामों में अपनी जिम्मेदारी समझें।

    सुबर्णा घोष ने शुरू की ऑनलाइन मुहिम

    दरअसल, लॉकडाउन के दौरान सुबर्णा पर घर और ऑफिस के कामकाज का बोझ आ पड़ा। याचिका उन्हीं के अनुभवों का सार और उनके ही घर की कहानी है। बल्कि यूं कहें-एक तरह से घर-घर की कहानी है। तमाम महिलाएं ऐसी ही परिस्थितियों का सामना कर रही हैं। घरेलू कामकाज की जिम्मेदारी सिर्फ उन्हीं के ऊपर होती है। खाना बनाना, साफ-सफाई, कपड़े धोना, तह करना, बिस्तर इत्यादि वही करती हैं। सुबर्णा एक चैरिटी संस्था भी चलाती हैं। उनके पति बैंकर हैं।

    ऑनलाइन पिटीशन का मकसद- लोगों की सोच में आए बदलाव

    PM मोदी को पंक्तियों में बताई ‘मन की बात’

    • लॉकडाउन के बहाने से यह बात याद आई
    • घरबंदी मर्दों को क्या किसी ने नहीं समझाई
    • घर का काम औरत का है, बोलके उसने ठुकराया
    • जीडीपी की बात छोड़ो, अपनों ने भी भुलाया
    • तब सोचा क्यों न मोदीजी से बात चलाएं
    • कि अगले स्पीच में मर्दों को ये याद दिलाएं
    • घर का काम हर दिन है सबका
    • लॉकडाउन में फिर काम क्यों बढ़ता?
    • भागीदारी ही है जिम्मेदारी
    • क्या बराबरी नहीं इंडिया को प्यारी?

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