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    Friday, May 7, 2021

    रमज़ान मुबारक – रमज़ान की रौनकें रोशन करती हैं राह ए ज़िंदगी

    उत्तराखंड से कार्यकारी संपादक आशीष तिवारी की रमज़ान स्पेशल रिपोर्ट –

    भारत कई संस्कृतियों का मेल हैं…… सभी संस्कृतियों की अपनी मान्यताएं हैं … लेकिन सभी धर्मों का मकसद एक है  प्रेम , करुणा और भाईचारा ….  बस निभाने का तरीका अलग-अलग हैं। भारत में कई त्योहार मनाए जाते हैं या यूँ कहें हिन्दुस्तान त्योहारों का देश है तो ज्यादा सही होगा।  कई नव वर्ष हमारे देश में मनाये जाते हैं साथ ही एक से अधिक कैलेंडर भी हमारे देश में माने जाते हैं…..  सभी धर्मों के अपने अलग महीने होते हैं, इसमें कई परंपराएं शामिल होती हैं…..  कई मान्यतायें भी शामिल होती हैं , लेकिन सभी का उद्देश्य ख़ुशी औए एकता  पैगाम देना होता है …. ऐसे ही माह ए रमज़ान का अपना ख़ास महत्व होता हैं, जो इस्लामिक देशो  भारत में भी बड़े उत्साह और जोश से मनाया जाता हैं ….. 

    यह मुस्लिम संस्कृति का एक बहुत ही मुक़द्दस महीना होता है, जिसके नियम बहुत कठिन होते हैं।  रमज़ान के दिन और रात की चहल पहल और सरगर्मियां देखते ही बनती हैं। इस दौरान मुस्लिम इलाको में रौनक और भीड़भाड़ माहौल को अलग ही रंग नज़र आता है।  सभी आपस में प्रेम से मिलते हैं. गिले शिक्वे भुलाकर सभी एक दुसरे को अपना भाई मानकर रमज़ान में दुआएं करते हैं। कोरोना संकट के इस चुनौती भरे साल में रमजान 12 अप्रैल को शुरू होकर 12 मई तक की रौनक देखि जाएगी तो चलिए आपको बताते हैं इसी पवित्र माह ए रमज़ान से जुडी ख़ास जानकारियां – 

    रमज़ान का इतिहास –

    रमजान के इतिहास के बारे में बात करें तो इस्लामिक मान्यता के अनुसार, 610 ईसवी में पैगंबर मोहम्मद साहब पर लेयलत-उल-कद्र के मौके पर पवित्र कुरान शरीफ नाजिल हुई थी। तब से यह महीना रमजान माह के रूप में मनाया जाने लगा। कुरान में भी रमजान माह के बारे में बताया गया है। रमजान माह में ही अल्लाह ने पैगंबर मोहम्मद साहब इस्लाम के दूत के रूप में चुना था। इस पाक महीने को शब-ए-कदर कहा जाता हैं. मान्यता यह हैं कि इसी दिन अल्लाह ने अपने बन्दों को “कुरान शरीफ” से नवाज़ा था. इसलिए इस महीने को पवित्र माना जाता हैं और अल्लाह के लिए रोज़ा अदा किया जाता है, जिसे मुस्लिम परिवार का छोटे से बड़ा सदस्य पूरी शिद्दत से निभाता हैं.

    कैसे रखा जाता हैं रमज़ान में रोज़ा ? 

    रमज़ान में रोज़ा रखा जाता हैं जिसे अल्लाह की इबादत कहते हैं. रोज़ा रखने के नियम बड़े सख्त होते हैं। 

    • सहरी: सहरी का बहुत महत्व होता है, इसके लिए सुबह सूरज निकलने के डेढ़ घंटे पहले उठना होता हैं और कुछ खाने के बाद ही रोजा शुरू होता हैं ….  इसके बाद पूरा दिन कुछ भी खाने पीने की मनाही रहती है। 
    • इफ्तार: शाम को सूरज डूबने के बाद कुछ समय का अंतराल रखते हुए रोजा खोला जाता हैं. जिसका समय निश्चित होता है….. 
    • तरावीह: रात को एक निश्चित समय पर तरावीह की नमाज अदा की जाती हैं, यह समय लगभग 9 बजे का होता हैं. साथ ही मज़िदो में कुरान पढ़ी जाती हैं. ये सिलसिला पूरे माह रमज़ान के दौरान चलता हैं इसके बाद चाँद के अनुसार 29 या 30 दिन बाद ईद का जश्न मनाया जाता हैं.

    रमज़ान के नियम –

    रमज़ान के नियम बहुत ही कठिन होते हैं. कहा जाता हैं इससे इंसान और अल्लाह के बीच की दुरी कम होती हैं. इन्सान में धर्म के प्रति भावना बढ़ती हैं, साथ ही अल्लाह पर विश्वास पक्का होता हैं. रमज़ान में एकता की भावना बढ़ती है.

    • अल्लाह का नाम लेना, कलाम पढ़ना 
    • गलत आदतों से दूर रहे 
    • लड़ाई झगडे से दूर रहकर प्रेम भाव रखना  
    • महिलाओं के प्रति अच्छी भावना 
    • नेकी का रास्ता दिखाया जाता हैं 
    • अस्त्गफ़र करे ,रमज़ान में अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगे  
    • जन्नत की दुआ जन्‍नतुल फिरदौस की दुआ करना …… 
    • चैरिटी के लिहाज से भी रमजान का है खास महत्व रमजान के दौरान जकात यानी चर्बी को भी बेहद जरूरी बताया गया है इसके तहत अगर किसी के पास साल भर उसकी जरूरत से अलग साढ़े 52 तोला चांदी या उसके बराबर का कैश या कीमती सामान है तो उसका ढाई फीसद जकात अनुदान के रूप में गरीब और जरूरतमंद मुस्लिम को दिया जाता है । वही ईद के दिन से ही फितरा यानि एक तरह का दान जो हर मुस्लिम को अदा करना होता है इसमें 2 किलो 45 ग्राम गेहूं की कीमत तक की रकम गरीबों में दान की जाती है .…. यानी रमज़ान मज़लूम लोगों की मदद का भी संदेश देता है।    

    तो आप भी अगर मुस्लिम समाज का हिस्सा हैं और रमज़ान की रौनकों से ज़िंदगी को रोशन करना चाहते हैं तो अपने खुदा की इबादत में दिल लगाइये और दुआ कीजिये कि मुल्क का मुस्तकबिल रोशन हो और आप अपनी नेकियों से मुल्क की तरक्की में अपना कामयाब किरदार निभा सकें।    

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