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देहरादून में बायोडिग्रेडेबल व इको फ्रेंडली कपड़े बनाने पर शोध के नतीजे शानदार – डॉ भावना गोयल

आज दुनियाभर के देशों में पॉलिथीन \ प्लास्टिक आदि से होने वाले प्रदूषण का स्तर काफी तेजी से बढ़ा है, जो कि पूरे विश्व के लिए एक चिंताजनक विषय बन गया है, और आने वाले समय में और भी गंभीर होने वाला है कई सारे देशो की सरकारो द्वारा प्लास्टिक प्रदूषण के इस मुद्दे को लेकर कड़े फैसले लिये जा रहे है। प्लास्टिक प्रदूषण को नियत्रित करना मात्र सरकार की ही ज़िम्मेदारी नहीं है। इस समस्या का समाधान तभी संभव है, जब हम सभी इस समस्या को लेकर जागरुक हो और इसे रोकने में अपना योगदान दे। मुमकिन जगहों पर प्लास्टिक के बढ़ते हुए उपयोग को रोककर ही इस भयावह समस्या पर काबू पाया जा सकता है। आज के हालात में इस विशेष चुनौती के समाधान को स्वीकार करते हुए पोस्ट डॉक्टरल वूमेन साइंटिस्ट (यूजीसी) व सचिव उन्नति महिला उद्यमिता एवं प्रशिक्षण समिति देहरादून, डॉ भावना गोयल भारत सरकार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के इक्विटी एम्पावरमेंट एंड डेवलपमेंट (SEED) डिवीजन की परियोजना के तहत उपयोगी प्राकृतिक संसाधन ( जो कि अगर प्रयोग में नहीं लाए तो बेकार चले जाएंगे) से एक बायोडिग्रेडेबल व इको फ्रेंडली कपड़े को बनाने पर शोध कर रही हैं।जिस से बने मूल्य वर्धित उत्पादों का उन जगहों पर प्रयोग किया जाएगा जहां पर हम रोजमर्रा के प्रयोग में पॉलिथीन और प्लास्टिक प्रयोग में लाते हैं। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रदूषण को रोकना स्थानीय महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक विकास के माध्यम से संपूर्ण क्षेत्र का विकास करना व प्राकृतिक संसाधनों को व्यर्थ जाने से रोक कर उनका लाभकारी कार्यों में प्रयोग करना है इस परियोजना के तहत देहरादून के इलाकों जैसे गुच्चू पानी , रायपुर ,रानी पोखरी ,जौलीग्रांट एरिया क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया वह पाया गया कि यहां पर बिच्छू घास पाई जाती है इस से निकले हुए देशों से विभिन्न प्रकार के टेक्सटाइल उत्पाद बनाए जा सकते हैं जो कि पॉलिथीन के प्रयोग को रोक सकते हैं जो कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का एक अच्छा साधन हो सकती है स्थानीय लोग अपनी जगह पर है घर के इन उत्पादों को बना सकते हैं।

गुच्चू पानी एरिया में क्षेत्र में पाई जाने वाली बिच्छू घास से निकलने वाले रेशों का प्रयोग स्थानीय लोगों के लिए एक रोजगार के साधन के रूप में स्थापित करने का सबसे बड़ा फायदा हैं। लाभ यह है कि वहां पर प्राकृतिक रूप से पानी उपलब्ध है जो की बिच्छू घास से रेशा निकालने के लिए बहुत जरूरी है इस प्रकार हम ऐसे प्राकृतिक संसाधन जो कि बेकार जा रहे हैं उन्हें उपयोग में लाकर स्थानीय लोगों के लिए एक स्थाई रोजगार का साधन बन सकता है

इस प्रकार इस परियोजना के माध्यम से डॉक्टर भावना गोयल भावना गोयल अपनी टीम के सदस्यों के साथ एक महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उनके इस कार्य में सुविधा सुपरमार्केट कि मालिक मिसेज अमिता गुप्ता अपने देहरादून में स्थित सुविधा सुपरमार्केट में ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाए गए मूल्य वर्धित उत्पादों को मार्केटिंग प्रदान कर ग्रामीण महिलाओं के विकास में अपना योगदान देने के लिए आश्वासन प्रदान किया है।

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