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बर्फबारी और बारिश में अब मतदान की चुनौती , सैकड़ों पोलिंग बूथ तक पहुंचना भी मुश्किल

विशेष रिपोर्ट – आशीष तिवारी
उत्तराखंड विधान सभा चुनाव में पहले उम्मीदवारों के सामने मौसम बड़ा खलनायक साबित हो रहा है वहीँ अब पोलिंग बूथों पर ड्यूटी करने जा रहे सरकारी कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत मौसम बन रहा है। पहाड़ों में दूर दुर्गम इलाकों में मतदान कराना हमेशा से बड़ी चुनौती रहा है। सैकड़ों ऐसे पोलिंग बूथ हैं जहाँ तक पहुंचना लोहे के चने चबाना जैसा होता है।
सिर्फ एक उदाहरण से आप समझ सकते हैं कि नई सरकार बनाने के लिए लोगों को कितनी तकलीफ झेलनी पड़ती है। बदरीनाथ सीट के डुमक बूथ तक पोलिंग पार्टियों को 20 किलोमीटर पैदल यात्रा करनी पड़ेगी तो वहीँ उत्तरकाशी जिले का मौंडा स्थित बूथ जिला मुख्यालय से सबसे ज्यादा 256 किमी दूर है।
हांलाकि मुख्य निर्वाचन अधिकारी सौजन्या ने मीडिया को बताया कि इस बार कुल 11647 बूथों पर मतदान होगा। इनमें 4504 बूथ ऐसे हैं, जहां पोलिंग पार्टियों को पैदल यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। पांच हजार 43 बूथ ऐसे हैं, जहां पोलिंग पार्टियों को एक किलोमीटर तक पैदल चलना होगा।
लेकिन असल मुसीबत तो उन इलाकों की है जहाँ समस्या बड़ी है। एक आंकड़े के मुताबिक 845 बूथों पर एक से दो किलोमीटर, 508 बूथों पर दो से तीन किलोमीटर, 290 बूथों पर तीन से चार किलोमीटर, 195 बूथों पर चार से पांच किलोमीटर, 106 बूथों पर पांच से छह किलोमीटर, 38 बूथों पर छह से सात किलोमीटर, 51 बूथों पर सात से आठ किलोमीटर, 12 बूथों पर आठ से नौ किलोमीटर, 22 बूथों पर नौ से 10 किलोमीटर, आठ बूथों पर 10 से 11 किलोमीटर, पांच बूथों पर 11 से 12 किलोमीटर, तीन बूथों पर 12 से 13 किलोमीटर, तीन बूथों पर 13 से 14 किलोमीटर, पांच बूथों पर 14 से 15 किलोमीटर और नौ बूथों पर 15 से 20 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करनी पड़ेगी।
इसका मतलब आप समझिये कि जिस उत्तराखंड में सीट केवल सत्तर है वहाँ इस डिजिटल युग में भी मतदान कराना किसी पहाड़ को तोड़ने से कम नहीं है।

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