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मेडिकल पढाई के लिए आखिर यूक्रेन क्यों जाते हैं भारतीय स्टूडेंट्स ?

Special Story : आशीष तिवारी
 रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बीच जब देश भर के भारतीय स्टूडेंट्स वहां फंसे हैं ऐसे में एक बड़ा सवाल और जिज्ञासा लोगों के मन में आ रही है कि आखिर ऐसा क्या है जिसकी वजह से भारतीय युवा यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने जाते हैं।
लिहाज़ा हमने सोचा कि आपकी इस जिज्ञासा को शांत किया जाए। दरअसल मेडिकल की पढ़ाई भारत से यूक्रेन में कहीं सस्ती है लिहाज़ा पढाई जब कम बजट में हो जाए तो हर्ज़ ही क्या है। लिहाज़ा  छात्र यूक्रेन में जाकर एमबीबीएस की पढ़ाई करते हैं। जो कि भारत और उत्तराखंड से कई गुना सस्ती पड़ती है।
 
यूक्रेन में भारत के मुकाबले बेहद कम 4 लाख तक है सालाना फीस 
 
यूक्रेन में युद्ध के कारण संकट खड़ा हो जाने से भारतीय लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिसमें अधिकतर बच्चे मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन गए थे जो अब भारत सरकार के सहयोग से वापस लौट रहे हैं। मेडिकल एक्सपर्ट मानते हैं कि उत्तराखंड की तुलना में यूक्रेन में फीस कई गुना कम है। जिसकी वजह से युवा दूसरे देशों में मेडिकल की पढ़ाई के लिए जाना पसंद करते हैं। जानकार बताते हैं
कि अगर भारत सहित हमारे राज्य उत्तराखंड में मेडिकल की पढ़ाई सस्ती हो जाए और सीटें बढ़ जाए तो बच्चों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी। आपको बता दें कि देवभूमि उत्तराखंड से बड़ी संख्या में मेडिकल की पढ़ाई के लिए स्टूडेंट्स रसिया, चायना आदि देशों में जाते हैं। यूक्रेन में मेडिकल की फीस सालाना 4 लाख रुपए तक है। जबकि उत्तराखंड में निजी मेडिकल कॉलेज में ये फीस 17 से 20 लाख तक ली  जाती है। अब ऐसे में आप अंदाज़ा लगाइये कि भारत में एक स्टूडेंट की फीस में कितने और स्टूडेंट  यूक्रेन जैसे देश में वही पढाई कर सकते हैं।

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