Flash Story
मुख्यमंत्री धामी ने लॉन्च किए राजस्व विभाग के 6 वेब पोर्टल, खतौनी से लेकर भू-अनुमति तक सेवाएँ हुईं ऑनलाइन
“मानक मंथन” से उद्योगों में CSR और गुणवत्ता को नई दिशा : सौरव त्रिपाठी
मेरठ ने रचा इतिहास पहली बार भक्ति एवं देश भक्ति का संपूर्ण समागम देखने को मिला
क्राइम लिट फेस्ट के समापन दिवस पर साहित्य, कानून और सिनेमा का संगम
ILI दिल्ली के सीनियर प्रोफेसर (डॉ.) एस. शिवकुमार NLSA की सेंट्रल अथॉरिटी के सदस्य नियुक्त
मुख्यमंत्री धामी के “ड्रग्स फ्री उत्तराखण्ड” विज़न को मिली रफ्तार, आईजी कुमाऊँ रिद्धिम अग्रवाल के निर्देशन में SOTF की बड़ी कार्रवाई 
मुख्यमंत्री धामी और डॉ. धन सिंह रावत के प्रयास रंग लाए, Dr. Sushil Ojha के नेतृत्व में दून चिकित्सालय में विश्वस्तरीय नेत्र सर्जरी
आर्थिक तंगी से जूझ रहे प्रिंट मीडिया पर मोदी सरकार ने बरसाई सौगातें 
देहरादून में वन खेलकूद प्रतियोगिता का दूसरा दिन रोमांचक — कई राज्यों के बीच फुटबॉल, हॉकी व बैडमिंटन मुकाबले

टिहरी के इस गांव में लोगों ने आज तक नहीं खाई दवा, सिर्फ जड़ी-बूटियों का ही करते हैं सेवन

[ad_1]

टिहरी. टिहरी जिले (Tehri District) में एक गांव ऐसा भी है जहां आज भी लोग बीमार होने पर दवा नहीं खाते हैं. यहां के लोग वर्षों से जड़ी- बूटियों से अपना इलाज कर रहे हैं. भारत- तिब्बत सीमा (Indo-Tibetan Border) पर स्थित इस गांव का नाम है गंगी. गंगी गांव (Gangi village) में ऐसी दुर्लभ जड़ी-बूटियों का खजाना है जो शायद ही कहीं और पाया जाता हो. यही वजह है कि यहां के लोग बीमार पड़ने पर अंग्रेजी दवाई खाने के बजाए जड़ी-बूटियों का ही सेवन करते हैं और उनकी तबीयत में सुधार भी हो जाती है. खास बात यह है कि इस गांव के लोग कोरोना वायरस फैलने के बाद भी अंग्रेजी दवा का न के बराबर सेवन किया. इन लोगों ने इन्ही जड़ी- बूटियों से अपना इलाज किया और ठीक हो गए.

जानकारी के मुताबिक, नई टिहरी जिला मुख्यालय से करीब 120 किलोमीटर की दूरी पर भारत- तिब्बत सीमा पर स्थित है टिहरी जिले का सीमान्त गांव गंगी है. करीब 150 की आबादी वाले इस गांव में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. लेकिन प्राकृतिक खूबसूरती और दुर्लभ जड़ी- बूटियों का यहां खजाना है. और यहां के लोगों ने आज तक ऐलोपैथिक दवाइयां नहीं खाई है. यहां अतीस, कूट, कुटकी, चिरायता, छतवा, और सिंगपरणी जैसी दुर्लभ जड़ी- बूटियां होती हैं जो बुखार, खांसी, पेट से संबधित बीमारी, सूगर और लीवर से संबधित बीमारियों में काफी फायदेमंद हैं. कोरोना महामारी के दौर में भी यहां के लोगों ने दवाइयां नहीं खाई और कोरोना के लक्षण होने पर इन्ही जड़़ी बूटियों का काड़ा पीकर अपना इलाज खुद किया.

स्वस्थ्य रहना का कारण भी यही जड़ी बूटियां हैं

सीमान्त क्षेत्र गंगी के लोगों की आजीविका का साधन मुख्य रूप से खेती और पशुपालन है. गंगी के लोगों का कहना है कि पीढ़ियों से वो इन्ही जड़ी- बूटियों के सहारे अपना इलाज करते आ रहे हैं. और यहां अभी कई जड़ी- बूटियां ऐसी हैं, बारे में उन्हें भी नहीं पता है. अनदेखी के चलते आज गंगी क्षेत्र उपेक्षा का भी शिकार हो गया है और विकास से पिछड़ता जा रहा है. हैल्थ एक्सपर्ट का भी मानना है कि गंगी क्षेत्र में ऐसी ऐसी दुर्लभ जड़ी- बूटियां हैं जिन्हें कई बीमारियों में यूज किया जा सकता है. और गंगी के लोगों के स्वस्थ्य रहना का कारण भी यही जड़ी बूटियां हैं.

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top