Flash Story
देहरादून : उत्तरायणी कौथिक महोत्सव-2026 का शुभारंभ, राज्यपाल ने दी प्रेरणा।
लोकतंत्र की मजबूती में मतदाता की निर्णायक भूमिका : बंशीधर तिवारी
मुख्यमंत्री धामी ने लॉन्च किए राजस्व विभाग के 6 वेब पोर्टल, खतौनी से लेकर भू-अनुमति तक सेवाएँ हुईं ऑनलाइन
“मानक मंथन” से उद्योगों में CSR और गुणवत्ता को नई दिशा : सौरव त्रिपाठी
मेरठ ने रचा इतिहास पहली बार भक्ति एवं देश भक्ति का संपूर्ण समागम देखने को मिला
क्राइम लिट फेस्ट के समापन दिवस पर साहित्य, कानून और सिनेमा का संगम
ILI दिल्ली के सीनियर प्रोफेसर (डॉ.) एस. शिवकुमार NLSA की सेंट्रल अथॉरिटी के सदस्य नियुक्त
मुख्यमंत्री धामी के “ड्रग्स फ्री उत्तराखण्ड” विज़न को मिली रफ्तार, आईजी कुमाऊँ रिद्धिम अग्रवाल के निर्देशन में SOTF की बड़ी कार्रवाई 
मुख्यमंत्री धामी और डॉ. धन सिंह रावत के प्रयास रंग लाए, Dr. Sushil Ojha के नेतृत्व में दून चिकित्सालय में विश्वस्तरीय नेत्र सर्जरी

तेजी से पिघल रहा गंगोत्री ग्‍लेशियर, 15 साल में घटा 0.23 स्‍क्‍वायर किमी क्षेत्र – केंद्रीय पर्यावरण मंत्री

उत्‍तराखंड  में स्थित गंगोत्री ग्‍लेशियर बेहद तेजी से पिघल रहा है. गुरुवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने राज्‍यसभा में जानकारी दी है कि पिछले 15 साल में यानी 2001 से 2016 तक गंगोत्री ग्‍लेशियर का करीब 0.23 स्‍क्‍वायर किमी हिस्सा घट गया है.उनके मुताबिक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन  इस ग्‍लेशियर की निगरानी कर रहा है. इसके लिए इंडियन सेंसिंग रिमोट सैटेलाइट के आंकड़ों का इस्‍तेमाल किया जा रहा है.पर्यावरण मंत्री का बयान बीजेपी के महेश पोद्दार के एक सवाल के जवाब में दिया गया था, जिन्होंने उन रिपोर्ट की पुष्टि करने की मांग की थी कि जिसमें कहा गया था कि वायुमंडल में ब्लैक कार्बन की कथित उपस्थिति के कारण ग्लेशियर पिघल रहा था..इनमें यह भी कहा गया था कि पिछले दो दशक से ग्लेशियर किस हद तक पिघल रहा है.उन्होंने निचली घाटियों में बसावटों की सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे उपायों के बारे में भी पूछा था.
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि हिमालय के ग्लेशियर किस हद तक पीछे हट गए हैं, यह एक जटिल विषय है, जिसका अध्ययन भारत और दुनिया भर के वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न केस स्टडीज की जांच, डाटा जुटाने और विश्लेषण के माध्यम से किया गया है. यह हिमालय के क्षेत्रों में किया गया है….मंत्री ने कहा कि हिमालय में स्थिर, पीछे हटने वाले या यहां तक कि आगे बढ़ने वाले ग्लेशियर हैं, जिससे हिमनदों की गतिशीलता की जटिल भौगोलिक और चक्रीय प्रकृति पर जोर दिया जाता है….  रिपोर्ट से पता चलता है कि हिमालयी क्षेत्रों में ब्लैक कार्बन की मौजूदगी दिखी है. हालांकि, गंगोत्री ग्लेशियर के बड़े पैमाने पर नुकसान और पीछे हटने पर इसके प्रभाव का अध्ययन नहीं किया गया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top