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युवा उत्तराखंड को युवा दिवस पर कुछ नए संकल्प लेने चाहिए ?

विशेष रिपोर्ट – आशीष तिवारी

12 जनवरी को हर साल राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रीय युवा दिवस भारत के उन युवाओं व नौजवानों को समर्पित एक खास दिन है, जो देश के भविष्य को बेहतर और स्वस्थ बनाने का क्षमता रखते हैं। भारतीय युवा दिवस को 12 जनवरी को मनाने की एक खास वजह है। इस दिन स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था। स्वामी विवेकानंद की जयंती को देश के युवाओं के नाम पर समर्पित करते हुए हर साल राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।आज उत्तराखंड भी युवा प्रदेश है , युवाओं की संख्या बहुतायत में है। लेकिन विडंबना ये भी है कि पहाड़ में समस्याएं भी गंभीर हैं।

आज ज़रूरत है कि हम और आप संकल्प लें एक बेहतर उत्तराखंड के निर्माण का , संकल्प लें बढ़ती वैमनस्यता को मिटाने और सामूहिक प्रयास को बढ़ाने का , संकल्प लें पलायन और नशाखोरी के खिलाफ एकजुट होने का और एक ज़िम्मेदार सरकार की आधारशिला रखने के लिए मतदान की ज़िम्मेदारी निभाने का यही संकल्प हमें और आपको मौक़ा देगा जब हम अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए एक समृद्ध और सुरक्षित भविष्य की नीवं को सशक्त बना सकते हैं। 

स्वामी विवेकानंद एक परिचय – 
दुनिया को एक नई रोशनी दिखाने वाले भारत के सपूत स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। स्वामी विवेकानंद का असली नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। वह वेदांत के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। छोटी उम्र से ही उन्हें अध्यात्म में रुचि हो गई थी। पढ़ाई में अच्छे होने के बावजूद जब वह 25 साल के हुए तो अपने गुरु से प्रभावित होकर नरेंद्रनाथ ने सांसारिक मोह माया त्याग दी और संयासी बन गए। संन्यास लेने के बाद उनका नाम विवेकानंद पड़ा। 1881 में विवेकानंद की मुलाकात रामकृष्ण परमहंस से हुई।
स्वामी विवेकानंद को संयमित और मर्यादित वैश्विक ज्ञान का महासमुद्र माना जाता है। वह धर्म, दर्शन, इतिहास, कला, सामाजिक विज्ञान, साहित्य के ज्ञाता थे। शिक्षा में अच्छे होने के साथ ही वह भारतीय शास्त्रीय संगीत का भी ज्ञान रखते थे। इसके अलावा विवेकानंद जी एक एक अच्छे खिलाड़ी भी थे। वह युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। उन्होंने कई मौकों पर अपने अनमोल विचारों और प्रेरणादायक वचनों से युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। इसलिए स्वामी विवेकानंद जी जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है।
दुनिया को हमेशा रास्ता दिखाएगी ये स्मृतियाँ  – 
  • स्वामी विवेकानंद ने 1897 में कोलकाता में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी। वहीं 1898 में गंगा नदी के किनारे बेलूर में रामकृष्ण मठ की स्थापना भी की थी। 11 सितंबर 1893 में अमेरिका में धर्म संसद का आयोजन हुआ, जिसमें स्वामी विवेकानंद भी शामिल हुए थे। यहां उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत हिंदी में ये कहकर की कि ‘अमेरिका के भाइयों और बहनों’। उनके भाषण पर आर्ट इंस्टीट्यूट ऑफ शिकागो में पूरे दो मिनट तक तालियां बजती रहीं। जो भारत के इतिहास में एक गर्व और सम्मान की घटना के तौर पर दर्ज हो गई। तो आइये हम अपने अभूतपूर्व नायक की ज़िंदगी और शिक्षाओं से प्रेरणा लें और संकल्प करें अपनी ज़िम्मेदारी और वफ़ादारी को शत प्रतिशत निभाने की

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